Wednesday, 27 May 2020

युधिष्ठिरा

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द्रौपदीस तू पणास लावले  युधिष्ठिरा!
केशवास व्याप खूप वाढले युधिष्ठिरा!



एकदा हरून द्यूत खेळलेस का पुन्हा?
अनुद्युतास खेळणे न शोभले युधिष्ठिरा!



द्यूत हा जुगार, सर्व गमविलेस त्यात तू.
अन् तुलाच 'धर्म', लोक बोलले युधिष्ठिरा! 



कंक होउनी द्युतात रंगलास तू पुन्हा,
बल्लवा नि कीचकास लढवले युधिष्ठिरा! 



सत्य बोलण्यामुळेच मान या जगी तुला. 
तू नरास कुंजरात तोलले युधिष्ठिरा! 



कृष्ण, पार्थ, भीम, दृष्टद्युम्न साह्य लाभले,
युद्ध त्यामुळे महान जिंकले, युधिष्ठिरा! 



कर्म कोणते असेल उच्च ते तुझे असे?
शेवटास स्वर्ग द्वार गाठले युधिष्ठिरा!
            

                       - अभिजीत काळे.
                      २ नोव्हेंबर २०१७.

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